संकटकाल में प्रेरणा की कृति वैक्सीन 50 - के के पाठक, आईएएस


जगत् सदा से समस्याओं भरा रहा है और जीवन सदा चुनौतियां लेता रहा है। कोविड-19 करोनावायरस ने 2019 के अंत व 2020 के आरंभ के साथ दस्तक दी और कुछ ही समय में वैश्विक महामारी के रूप में फैल गया। भारत भी प्रभावित हुआ, लाखों लोग बीमारी से संक्रमित हुए, हजारों लोग मारे गए। करोड़ों की जीविका प्रभावित हुई, इनमें बहुतों की तो छूट ही गई। लोग सड़कों पर पैदल चले, सैकड़ों मील, घर लौटने के लिए. त्रासदी जीवन और जीविका दोनों की थी। 

ऐसे अंधकार के कालखंड में, जबकि जिजीविषा हर ओर प्रकाश की राह देख रही है, उनमें श्री नवीन जैन की ये कथात्मक प्रेरणाएँ किरण बनकर उतरती दिखती हैं। वे कोरोना की व्याधि से भयाक्रांत व जीविका जाने से सर्वहारा बने वर्ग के लिए पूरी निष्ठा से लोकसेवक के रूप में कार्य कर रहे थे, विशेष रूप से उन्हें सुविधाजनक रूप में घर पहुंचाने का, उसी क्रम में मानवीय संवेदना के साथ उन्होंने इन प्रेरक प्रसंगों भरी पंक्तियों का सृजन किया। आधुनिक ऑडियो माध्यम में वे पहले ही विपुल लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी हैं, परम्परागत लिखित रूप में भी वे मानस पटल का अमिट लेख बन कर प्रकाशित हो रही हैं। 

छोटे अध्यायों में निबद्ध व बड़े संदेशों को लिए यह कृति सरल व प्रवाहमय है, इतनी कि सभी वर्ग पढ़ सकें, बिना व्यवधान, बिना व्याख्या। वे सीधे अंतस् को छूती हैं, हृदय को स्पंदित करती हुई भी, चेतना को झकझोरती हुई भी. इसलिए वे केवल कोरोना कालखंड की वैक्सीन ही नहीं रह गई हैं, पूर्व व पश्चात् के काल की भी संचेतना बन गई हैं। आशा है, एक दिन जगत् फिर बदल जाएगा, जब कोरोना की कोई चिकित्सकीय वैक्सीन आ जाएगी। जीवन सहज होने के साथ लोग कुछ समय बाद संभवतः कोरोना को बिसराने लगें, तब भी बानगी में रहेगी और यह कृति अपनी वैक्सीन लिए लोगों को जीवन के सूत्र सिखाती मिलेगी।

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