के.के. पाठक नागपुर के नए पुलिस कमिशनर, डॉ. अंकुश ने कहा अलविदा


नागपुर पुलिस कमिशनर पद से भारतीय पुलिस सेवा को अलविदा कहने वाले डॉ. अंकुश धनविजय हमेशा अपनी सेवाओं को लेकर याद किए जाते रहेगे। 30 नवम्बर को पुलिस सेवा में अपने आखरी दिन डॉ. अंकुश ने अपने लम्बे और बेहतरीन कार्यकाल को याद करते हुए सेवा से विदा ली। अंकुश के बाद अब 1983 बैच के वरिष्ठ आईपीएस के.के. पाठक को सरकार ने नागपुर के पुलिस कमिशनर का जिम्मा सौंप दिया है।
इस पद पर बेहतरीन सेवा देने वाले डॉ. अंकुश खासे चर्चित रहे। अपनी कार्यप्रणाली, लोगों से जुड़ाव और नागपुर में पुलिस की छवि सुधारने के मामले में डॉ. अंकुश को खास सफलता मिली। एम.कॉम, क्रिमिनल लॉ में एलएलबी कर पुलिस सेवा में आए डॉ. अंकुश ने कानून में ही अपनी डॉक्टरेट की उपाधि ली। उन्होंने प्रबंधन शिक्षा भी हासिल की और अपने कामकाज के दौरान प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया। 1982 बैच के जरिए भारतीय पुलिस सेवा में आने वाले डॉ. अंकुश ने 1982-87 तक बाहेन्दर एसपी के तौर पर सेवाएं दी। इसके बाद वे दो साल के लिए यवतमाल के एसपी रहे। करीब साढ़े तीन साल उन्होंने पूना में एसपी एंटी करप्शन ब्यूरो में सेवाएं दी और 1993 में एसपी रेलवे, पूना में पदस्थापित हुए। यहां उन्होंने तीन साल सेवाएं दी। नई जिम्मेदारी के तौर पर डॉ. अंकुश को एडिशनल कमिशनर ऑफ पुलिस स्टेट इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट, मुंबई में तैनाती दी गई।  1999-2000 तक वे अमरावती में पुलिस कमिशनर बने और एक नई शुरूआत की। 2001-03 तक नासिक में एसपीएल, आईजीपी, नासिक रेंज में सेवाएं दी। इसके बाद कंट्रोलर ऑफ लीगल मैट्रोलॉजी रहे और 2006 में उन्हें नागपुर पुलिस कमिशनर का जिम्मा सौपा गया, जिसे बेहतरीन अनुभव के साथ उन्होंने निभाया। 2009 में पुलिस पदक पाने वाले डॉ. अंकुश को कम्यूनल हारमनी एण्ड नेशनल इंटीग्रेशन के लिए संभागीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। साथ ही अंकुश महाराष्ट्र अल्प सेवा आयोग की ओर से 2003 के महात्मा गांधी पीस अवॉर्ड से भी सम्मानित होने वाले आईपीएस बने। इसी साल उन्हें अपनी बेहतरीन सेवाओं के लिए भी सम्मानित किया गया।
एक बेहतरीन पुलिस अधिकारी के तौर पर डॉ. अंकुश हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे और याद किए जाते रहेंगे।
- संदेश जे. व्यास, नागपुर, की कलम से विशेष।
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