‘संध्या’ में उजाला भरपूर!




भारतीय पुलिस सेवा में केरल काडर की वरिष्ठ अधिकारी बी. संध्या दक्षिण भारत ही नहीं, बल्कि देशभर में महिला आईपीएस अधिकारियों में खास पहचान रखती हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर संध्या ने जो मुकाम बनाया है, वह उन्हें भीड़ से पूरी तरह अलग करता है।

नाम सार्थक होते हैं! मान्यता की यह धारा बहुत पुरानी है। ...लेकिन केरल काडर की एक महिला आईपीएस अधिकारी ऐसी हैं, जिन पर यह मान्यता असर नहीं करती। उन्हें जानने की कोशिश करें, तो इस परम्परागत विचार के विपरीत उन्होंने बहुत कुछ बनाया है। ...और बहुत कुछ पाया है। बी. संध्या, 1988 बैच की आईपीएस हैं और केरल में प्रतिभाओं की स्थली कोट्य्यम से ताल्लुक रखती हैं। पेशे से पुलिस अधिकारी संध्या की रचनात्मकता, सक्रियता और सहभागिता उनके कद को कहीं ज्यादा बढ़ा देते हैं।
अमेरिका के इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ वुमन पुलिस की ओर से सम्मानित संध्या कई राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने कामकाज और रचनात्मकता की वजह से खास पहचान कायम कर चुकी हैं। अपने अनुभव बांटते हुए संध्या कहती हैं, ‘पुलिस सेवा से मुझे सीधे तौर पर लोगों से जुड़ाव बनाने का अवसर मिला। साथ ही मुझे विश्वभर की महिला पुलिस अधिकारियों से मिलने, उन्हें जानने-समझने का मौका मिला। इसी अनुभव की वजह से उन संभावनाओं के बारे में पता चला, जिन्हें लेकर हमारे देश में बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सुरक्षा मामले, लॉ एण्ड ऑर्डर को लागू करवाने में कठिनाईयां और उनसे निपटने के तौर-तरीके, अपराध प्रबंधन सहित पुलिस विभाग में मानव संसाधन जैसे विषयों को मैंने जाना और हमेशा उन्हें लेकर काम किया।’  संध्या की लेखन में भी गहरी रुचि है। वे बेहतरीन पेंटर भी हैं। समाज और प्रकृति से ताल्लुक रखने वाले विभिन्न विषयों पर संध्या की पेंटिग चर्चित हैं। संध्या कहती हैं, रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़ाव काम में ज्यादा परिणाम देने में मदद करता है। इससे तनाव दूर हो जाते हैं। साथ ही हमेशा खुद में कुछ नयापन नजर आता है। नजरिया विकसित होता है और सीखते रहने की ललक जिंदा रहती है।’ सहायक पुलिस अधीक्षक, शोरनूर से अपने करियर की शुरुआत करने वाली संध्या कई महत्त्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुकी हैं।
संध्या की रचनाएं
थारट्टू - (काव्य संग्रह, 1999)
थ्री शक्ति - (महिला सशक्तिकरण पर आधारित पुस्तक, 2000)
बालवाड़ी - (काव्य संग्रह, 2001)
रंथाल विलाक्कू - (काव्य संग्रह, 2002)
नीरमारूथिल उप्पन - (काव्य संग्रह, 2004)

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