लेखन में सुकून है - डॉ. राजेश कुमार व्यास



पुरानी कहावत है, ‘सौ शब्द लिखने के लिए हजार शब्द पढऩे होंगे और हजार लिखने के लिए लाख!’ ...लेकिन लाख शब्दों को एक जुबां देने और रचनात्मकता के धागे में पिरोने की कलात्मकता कम ही लेखकों में मिलती है। क्योंकि महज लिखना या लिखने का प्रयास ही महत्त्वपूर्ण नहीं है। जरूरी है उस भाव में उतर जाना, उन गहराईयों को छूके पार हो जाना। मन के भाव, उदगार, विचार और उफान लेती भावनाएं कागज पर उतारने में कामयाब हो जाना। राजस्थान सूचना सेवा के अधिकारी डॉ. राजेश व्यास ऐसी ही कलम के धनी हैं। उनकी पहचान, उनका व्यक्तित्व उनके लेखन की रचनात्मकता की ही तरह ही है।
लेखन जगत से गहरा नाता रखने वाले व्यास इसे अपने जीवन का अहम हिस्सा मानते हैं। व्यास कहते हैं, ‘लेखन में सुकून है। ऐसा सुकून जो कहीं और नहीं मिलता। सही मायने में देखें, तो लेखन के तार मन से जुड़े होते हैं। मन में उठते हिलोरे, विचारों का द्वंद, अनुभवों की कडिय़ां और लयबद्ध धाराएं एक प्रवाह का रूप लेकर सामने आ जाती हैं। एक गहरी संतुष्टि का एहसास लिए लेखन मन बस जुटा रहता है।’ देश के करीब-करीब सभी बड़े हिन्दीभाषी समाचार पत्रों में डॉ. व्यास की रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। कई बड़े समाचार पत्र-पत्रिकाओं के व्यास नियमित स्तंभकार भी हैं। डॉ. व्यास राजस्थान राज्य सेवा के पहले ऐसे अधिकारी भी हैं, जिनकी रचनाओं को नेशनल बुक ट्रस्ट ने प्रकाशित किया है। बीते दिनों डॉ. व्यास की नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यात्रा संस्मरण की पुस्तक ‘कश्मीर से कन्याकुमारी’ का लोकार्पण प्रसिद्ध साहित्यकार प्रयाग शुक्ल ने किया। इस पुस्तक में कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले भारत के महत्त्वपूर्ण और अछूते स्थलों के 14 संस्मरण शामिल किए गए हैं। इनमें वहां की प्रकृति, जीवन के साथ ही इतिहास और संस्कृति को संजोया गया है। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. मुकुन्द लाठ ने भी डॉ. व्यास के लेखन और पुस्तक को लेकर सराहना की। उनका कहना था, ‘डॉ. व्यास की पुस्तक असल में दृष्य चित्र की तरह है। जो चीजें लेखक ने देखी हैं उसको एक चित्र के रूप में इसमें उकेरा गया है। इसमें स्थान ही नहीं लोग, वहां का परिवेश का आकलन भी है।’
डॉ. व्यास केन्द्रीय साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी, फिल्म इन्स्टीट्यूट, पुणे के साथ ही देशभर के उच्च अध्ययन संस्थान, विश्वविद्यालयों आदि में मीडिया प्रबंधन, संप्रेषण कौशल, पर्यटन, कला-संस्कृति और साहित्य से जुड़े विषयों पर अतिथि व्याख्याता के रूप में पहचान रखते हैं। कविता, यात्रा साहित्य और कला आलोचना से ताल्लुक रखने वाली डॉ. व्यास की अब तक 18 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। घूमने के शौकीन व्यास ने देशभर की यात्राएं की है। डॉ. व्यास ने स्थान विशेष की भौगोलिकता की बजाय वहां के इतिहास, संस्कृति, परिवेश, वहां के जन-जीवन और सरोकारों मे रचते-बसते उन्होंने जो लिखा है, उसे गहरे से जिया है। दूरदर्शन व्यास के लिखे और शोध पर आधारित 20 कडिय़ों का यात्रा वृतान्त धारावाहिक ‘डेजर्ट कॉलिंग’ का निर्माण कर उसे अपने राष्ट्रीय चैनलों से प्रसारित कर चुका है। साथ ही डॉ. व्यास ने पर्यटन स्थलों के बहुत से वृत्तचित्र दूरदर्शन और अन्य चैनलों के लिए लिखने का साहस दिखाया है।
लिखने-पढऩे के शौक और शगल से दूर होती पीढ़ी के बीच विचारों को शब्द देने का जिम्मा निभा रहे व्यास ने पर्यटन जैसे चंचल, स्वच्छंद विषय पर बेहतरीन लेखन के जरिए भी एक लेखक की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है।
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