परिवर्तन के प्रवर्तक !

शिक्षा, चिकित्सा, गरीबी, जेंडर, ग्रामीण विकास सरीखे मसलों पर मजबूत पकड़ रखने वाले मनीष देश ही नहीं दुनिया की कई महत्त्वपूर्ण एजेंसियों को मार्गदर्शन कर चुके हैं।
मनीष तिवारी
संयुक्त निदेशक
एचसीएम-एसपीआरआई, जयपुर
कोशिशें कामयाब होती हैं। ऐसी लाखों मिसाल हैं। ...लेकिन एक शक्स ने सिलसिले को मिशन बनाने में कामयाबी हासिल की है। देश के विकास में कडिय़ों को बुनने में जुटे शिवचरण माथुर सोशल पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एचसीएम-एसपीआरआई) के मनीष तिवारी ने संगठित, सुनियोजित और सारगर्भित कार्यप्रणाली के जरिए न केवल अहम योजनाओं को बनाने में सफलता पाई है, बल्कि इन योजनाओं के जरिए देश को एक नया तजुर्बा दिलाने का भी माद्दा दिखाया है।
ग्यारह साल पहले बतौर शोध सहायक, एसपीआरआई में आए मनीष आज संयुक्त निदेशक की भूमिका में संस्थान और देश के समग्र विकास में अपने अनुभव से बड़ा योगदान दे रहे हैं। शिक्षा, चिकित्सा, गरीबी, जेंडर, ग्रामीण विकास सरीखे मसलों पर मजबूत पकड़ रखने वाले मनीष देश ही नहीं दुनिया की कई महत्त्वपूर्ण एजेंसियों को मार्गदर्शन कर चुके हैं। इनमें विश्व बैंक, यूनीसेफ, अमेरिकन एजेंसी आईएफईएस, रोजा लग्जमबर्ग फाउंडेशन, जर्मनी, एनयूएस, आईएफएफ, सहित भारत सरकार के योजना आयोग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और राजस्थान सरकार के करीब-करीब सभी विभागों से मनीष का जुड़ाव रहा है।
विश्व परिदृश्य में देश के विकास को लेकर बेहद आशांवित मनीष कहते हैं, ‘दुनियाभर में तेजी से विकास हो रहा है। लेकिन हमारे सामने दो मुद्दे हैं। विकास की दौड़ में बराबरी तक  पहुंचना और देश के लिए ऐसी योजनाएं विकसित करना जो सही मायने में परिवर्तन ला सकें। हमारी ग्रासरूट स्तर तक जितनी मजबूत पकड़ होगी, हम परिवर्तन उतनी जल्दी ला पाएंगे। हमारे पास मानव शक्ति है, ऊर्जा है, युवा है। जरूरत है, तो बस उस ऊर्जा को, युवा को सही दिशा में मोडऩे की।’ सामाजिक विकास की दुनिया में अहम स्थान रखने वाले मनीष देश के लिए थिंक टैंक का काम कर रहे हैं। ...और कहते हैं न कि थिंक टैंक देश चलाता है। जहां दूरदृष्टि होती है। जज्बा होता है। पर्दे के पीछे जुटे रहने का एक ऐसा मिशन भी होता है, जो देश को सही मायने में विश्व मंच पर पहचान दिलाने में जुटा होता है। देश के विकास में अहम योगदान देने वाली योजनाओं को बनाने, आम आदमी को उन योजनाओं से सही मायने में जोडऩे और देश को एक शृंखलाबद्ध तरीके से जोडऩे में इसी थिंक टैंक की अहम भूमिका है। मनीष भी इसी अहम भूमिका में पर्दे के पीछे देश को कामयाबी की नई ऊंचाईयों पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
शिक्षा विभाग के लिए ग्यारहवीं पंचवर्षीय मध्यावधि मूल्यांकन करने, स्वास्थ्य के सामाजिक सूचकांक (राजस्थान और टोरंटो का अध्ययन), स्वास्थ्य स्रोत में डाटा आंकलन, मातृ मृत्यु का ओटोप्सी सहित सहरिया पर पहली बार अध्ययन करने का साहस मनीष ने दिखाया है। साथ ही साथ मनीष के कई महत्त्वपूर्ण विषयों पर पेपर भी प्रकाशित हो चुके हैं। इन प्रकाशनों में ‘इफेक्टिवनेस ऑफ एक्रीडेटेड सोशल हैल्थ एटिविस्ट इन टोंक डिस्ट्रिक्ट’, ‘वॉटरशेड डेवल्पमेंट फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर पॉलिसी ईश्यूज’, ‘पॉवर्टी एलीवेशन प्रोग्राम्स विद स्पेशल रेफरेंस टू मनरेगा इन राजस्थान’, ‘प्लानिंग फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर डेवल्पमेंट इन राजस्थान’, ‘वायोलेंस ऑन वुमन एण्ड लैण्ड राइट्स’, ‘सोशल मार्केटिंग इन इंडिया’,  ‘नीड फॉर फोकस ऑन अरबन हैल्थ’, ‘डीसेंट्रलाइज पार्टीसिपेट्री प्लानिंग : लैसंस फ्रॉम राजस्थान’ सरीखे दर्जनभर से ज्यादा महत्त्वपूर्ण पेपर मनीष अब तक पेश कर चुके हैं। मनीष सोसायटी फॉर इंटरनेशनल डेवल्पमेंट और नेशनल एचआरडी नेटवर्क में राजस्थान चेप्टर के संयुक्त सचिव, की भूमिका में भी हैं। राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य व शिक्षा, राज्य योजना बोर्ड के कोर गु्रप में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर भी मनीष के अनुभव का लाभ सरकार को मिल रहा है।
युवा भारत में मजबूत कंधों की दरकार को पूरा करते मनीष भविष्य निर्माण को मजबूती देने में जुटे हैं। उनके अनुभव का लाभ देश के विभिन्न संस्थानों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से मिल रहा है। सामाजिक विकास के क्षेत्र में दूरियां खत्म करते मनीष का यह सफर एक नई ऊंचाई कायम करेगा।
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