विश्वास! जो आज भी अटूट है!


कभी-कभी किसी चेहरे की चमक ही हमें एक गहरा विश्वास दिलाती है। विश्वास अपनाने का, भरोसे का, ...और कभी न टूटने देने का! ऐसे ही विश्वास पर तो इतिहास रचा जाता है। राजस्थान काडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेन्द्र भाणावत की सेवाएं इसी अटूट विश्वास की जीती-जागती मिसाल हैं। उनके दरवाजे पर आया कोई व्यक्ति बीते 24 सालों से बिना समाधान नहीं लौटा। वे जहां-जहां रहे, अपने कामकाज से न केवल लोगों का दिल जीतन में कामयाब रहे, बल्कि युवा ऑफिसर्स के लिए भी बहुत कुछ विरासत में छोड़ते चले गए।


राजेन्द्र भाणावत
प्रबंध निदेशक, रीको
काडर : राजस्थान
बैच : 1988

भरोसेमंद मजबूत कंधे। बड़ी जिम्मेदारियां। पाक छवि और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्थाएं। शासन व्यवस्थाओं के संचालन में अगर इन्हीं सबका गुलदस्ता बनने की गुंजाइश निकलती, तो एक शक्स का गुलदस्ता सबसे ज्यादा महकता मिलता। बिलकुल फुलों के उस गुलदस्ते की तरह जिसमें रंग भी हैं, ...और रौनक भी। चहक भी है, ...और महक भी। भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के 1988 बैच के अधिकारी राजेन्द्र भाणावत ने अपने लम्बे अनुभव में न केवल लोगों का दिल जीतने में कामयाबी पाई, बल्कि शासन व्यवस्थाओं के प्रबंधन के मामले में वे औरों से बहुत आगे रहे।
रीको के प्रबंध निदेशक भाणावत कई महत्त्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। ...लेकिन उनकी सेवाएं फाइलों तक ही सीमित नहीं रहीं। यह बात जरा दिलचस्प है, लेकिन अहम भी। क्योंकि फाइलें टेबल पर ही चलती हैं, लेकिन भाणावत फाइलों से बाहर अपने क्षेत्र से पूरी तरह जुड़े रहते हैं। भाणावत के इसी जुड़ाव की वजह से वे जहां रहे, आम आदमी से उनका गहरा नाता रहा। भाणावत के बारां जिला कलक्टर कार्यकाल को याद करते हुए वरिष्ठ पत्रकार कुश कुमार कहते हैं, ‘वे हमेशा जड़ों से जुड़कर रहे। बिन बताए, आम आदमी की तरह शहर में निकल पड़ते। समस्याओं को जानते-समझते। समस्याओं से जूझता मुहल्ला हो या पुरानी बस्ती, अतिक्रमण हो या पानी की किल्लत। शायद ही कोई पहलू होगा, जो उनकी नजर से छिपता था। कई बार ऐसा होता था, जब वे सीधे पीडि़त पक्ष तक पहुंच जाते और बिना यह बताए कि कौन हैं, पूरी वास्तविकता पता कर लेते। फिर जब बारी आती समाधान की, तो उस मर्ज को मिटाने में पलभर भी नहीं लगाते।’ भाणावत राजस्थान में कई महत्त्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके हैं....

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1 comments:

  1. Anonymous19:52

    For Shri Rajendra Bhanawat's illuminous services, the State Govt should consider conferring him with a State Honour of a very high order.

    Hemant Mogra

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