जिंदादिल कोशिश ! - पंकज ओझा



आरएएस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष पंकज ओझा हैं गिनीज बुक ऑफ  वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल।

लीक से हटकर जुटने का साहस कम ही लोगों में होता है। ...और यह साहस अपनी व्यस्ततम जिंदगी में किया गया हो, तो क्या कहने! इसे क्रिएटिविटी की मिसाल ही कहेंगे कि 2001 बैच के आरएएस अधिकारी पंकज ओझा ने दुनिया का सबसे बड़ा पॉकेट चाकू बनाने में कामयाबी हासिल की और अपना नाम गिनीज बुक ऑफ    वर्ल्ड रिकॉर्ड सहित लिमका बुक तथा इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज करवाया।
राजस्थान के करीब एक हजार आरएएस अधिकारियों में पंकज इकलौते हैं, जिन्होंने गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज करवाया है। क्रिएटिविटी के मामले में शुरू से ही लीक से हटकर चलने वाले पंकज हमेशा कुछ नया करने में जुटे रहते हैं। व्यस्तता के बावजूद अपने लिए वक्त निकालते हैं। ज्योतिष का गहरा ज्ञान रखने वाले पंकज इन दिनों लाल किताब के अध्ययन में जुटे हुए हैं। कामकाजी जीवन के बाहर अपना निजी समय पूरी तरह अपनी पसंद पर निवेश करते हैं। इस बारे में पंकज कहते हैं, ‘मैं लम्बे समय से ज्योतिष के अध्ययन में जुटा हूं। मंत्रों पर भी मैंने गहराई से शोध किया है और रेकी भी सीखी है। यह सारा अध्ययन दिलचस्प है। सदियों पुरानी विधा आज हमारे पास शब्दों में रहस्यों सी गुंथी हुई है। जितना अध्ययन करो, दिलचस्पी उतनी ही बनती जाती है और हमारे ऋषियों के ज्ञान को करीब से जानने का मौका मिलता है।’
पंकज की शायरी में भी गहरी पकड़ है। जितना अपने काम को लेकर जज्बा पंकज में देखने को मिलता है, उतनी ही गहराई उनकी शायरी में मिलती है। पंकज की शायरी का संग्रह ‘जय घोष’ भी प्रकाशन के लिए तैयार है। शब्दों को सहजता के साथ मुस्कुराहट बना देने वाले पंकज न तनाव में आते हैं न दबाव में। यही वजह है कि खुशनुमा मिजाजी हमेशा उनके साथ चलती है। वे कहते हैं, ‘समस्याएं हर जगह होती हैं और मुश्किलें हमेशा हमारी टेस्टिंग के लिए आती हैं। बस उस वक्त को सहजता से जी लो, तो पीछे बस यादें बचती हैं।’ ढेर सारे पुस्कारों के साथ ‘राजीव गांधी राष्ट्रीय एकता सम्मान-2009’ से सम्मानित पंकज हमेशा नए प्रयोगों को लेकर जुटे रहते हैं। वे कहते हैं, ‘जिंदगी में नया करते रहना और आगे बढ़ते रहना यही मेरा फलसफा है। खुश रहो! जुटे रहो! ...तो सार्थक परिणाम जरूर आते हैं। अपने अनुभव से मैंने यही सीखा है, हमारी जिंदादिली ही हमें दिलों में बसाती है।’

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1 comments:

  1. Anonymous12:18

    pankaj ji ki jindagi ki ek chiz ahuri reh gaye hai.....unhe itra ( perfume) lagane ka bahut shauk bhi hai...! aap jab bhi ghar seh bahar nikalte hai toh apki apki pant/ jeans ki jeab meh ek choti si shishi atar ki jaror rehti hai. bade hi kush mijaz pankaj ko is kamyabhi ke liye mera salam...! apna naam nahi de raha hoh shayad pankaj ji jab yeh padhe ge aur dimag par thoda jor dalenge toh unkoh mera aiyena yaad ajayega.
    apka
    muflis...

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