जुनून जगाने का !



भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का अहम हिस्सा ‘कल्याणमयी संस्था’ संस्कार और सरोकार का संगम बनकर उभरी है। कल्याणमयी के अहम योगदान की वजह से ही प्राधिकरण देश का पहला ऐसा संस्थान बना है, जो वाकई लोगों का दिल जीतने में कामयाब हुआ है।

जुनून एक हद से पार चला जाए, तो जिद बन जाता है। ...और किसी ने सही कहा है, ‘जिद से दुनिया बदली जा सकती है।’ जुनून की हदों के पार एक योजनाबद्ध प्रणाली को अपना रही ‘कल्याणमयी’ ने यह साबित कर दिखाया है। करीब पच्चीस साल पहले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से स्थापित कल्याणमयी संस्था ने कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सबलिटी (सीएसआर) के मामले में मिसाल कायम की है। इस संस्था के जरिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण देश का पहला ऐसा प्राधिकरण बन गया है, जो आम आदमी का दिल जीतने में कामयाब हुआ है।
पच्चीस साल पहले शुरु हुआ कल्याणमयी का सफर एक सिलसिला बनकर उभरा। लेकिन इस सिलसिले को एक पल के लिए जैसे थाम कर कमान हाथ में ली अर्चना अग्रवाल ने। 2009 का पहला दिन प्राधिकरण के लिए एक नई आशा और उम्मीद की किरण लेकर आया। इस दिन प्राधिकरण की कमान बतौर चेयरमेन वी.पी. अग्रवाल ने संभाली, तो अर्चना के हाथों में कल्याणमयी की बागडोर सौंपी गई। ...और नेतृत्व का इंतजार खत्म हुआ। यहीं से शुरू हुई संस्कार और सरोकार के संगम की कहानी। अर्चना के नेतृत्व में कल्याणमयी को एक विजन मिला। टीम का गठन हुआ और शुरू हुआ सामाजिक सरोकारों का मिशन इम्पॉसिबल। अर्चना ने अपनी टीम के साथ बाहरी सामाजिक जिम्मेदारियों पर फोकस के साथ प्राधिकरण के भीतर भी सामाजिक पहलुओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अहम योगदान दिया।

रंग लाई मुहिम
कल्याणमयी के प्रयासों की बदौलत ही विमानपत्तन प्राधिकरण देश की ऐसी पहली सरकारी संस्था बना, जिसमें यौन शोषण नीति सबसे पहले लागू की गई। करीब 19 हजार कर्मचारियों को इस विषय को लेकर जागरुकता की मुहिम चलाने, नीतिगत निर्णयों से वाकिफ करवाने और एक सहज, सरल माहौल में कार्यक्षमता विकसित करने की लगातार ट्रेनिंग देने में कल्याणमयी ने अहम भूमिका निभाई है। इस बारे में अग्रवाल कहती हैं, ‘हम अपने लोगों की कार्यक्षमता बढ़ाने, बेहतरीन माहौल को बनाए रखने और यूनीसैक्स पॉलिसी को लेकर जागरुक करने के लिए लगातार जुटे हुए हैं। इसे लेकर कल्याणमयी की ओर से बुकलेट भी जारी की गई है। हमारी मुहिम रंग ला रही है।’

समसामयिक विकास का मिशन
हवाई अड्डा प्राधिकरण की ओर से देशभर में कल्याणमयी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण, कम्प्यूटर शिक्षा, चिकित्सा, खेल और समसामयिक विकास को लेकर मिशन बनाकर काम किया गया है। इसी मिशन की बदौलत अर्चना के नेतृत्व में वेस्ट पेपर मैनेजमेंट प्रणाली की नींव रखी गई, जो आज देश के कागज उद्योग में भी मिसाल बन गई है। सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं का रुझान भी अर्चना के नेतृत्व की वजह से ही इस प्रोजेक्ट की ओर हुआ।

बंद मुट्ठी लाख की!
सीएसआर को लेकर जबरदस्त कामयाबी हासिल कर चुकी कल्याणमयी देश के सभी केन्द्रीय प्राधिकरणों के लिए जीवंत केस स्टडी बन गई है। इस सफलता का पूरा श्रेय अर्चना अग्रवाल टीम को देती हैं। अपनी मजबूत टीम को लेकर आशान्वित अग्रवाल कहती हैं, ‘कल्याणमयी की सफलता का श्रेय पूरी टीम को है। हमारी टीम बंद मुट्ठी की तरह है। यही कल्याणमयी की ताकत है। हमारी टीम नए विचार, कार्ययोजनाओं को एक प्रारूप में ढालकर परिणाम को लेकर टीम जुट जाती है।’

सफलता के पीछे 5 क्रेजी वुमन -अर्चना

कल्याणमयी चेयरमेन अर्चना अग्रवाल से एक्सक्लूसिव बातचीत के चुनिंदा अंश-

‘कहते हैं न क्रांति के लिए भीड़ की नहीं, नेतृत्व की जरूरत होती है। कल्याणमयी की पांचो क्रेजी वुमन्स ने मजबूत नेतृत्व और योजनाबद्ध तरीके से काम किया है।’

आपके कार्यकाल में कल्याणमयी एक मुकाम पर है। कैसे?
समाज के लिए हमारी भागीदारी संस्कारों की देन है। मैं सहारनपुर से हूँ। 19 साल अपने माता-पिता के संस्कार लिए और अब 33 साल से विजय और मैं साथ हैं। इनके पिता खुद एक मिसाल हैं। समाज के लिए उनका योगदान अनुकरणीय रहा है। यही संस्कार हमारे पूरे परिवार में आए। विरासत में मिली इस धरोहर को कल्याणमयी का मंच मिला और परिणाम आपके सामने हैं।
कल्याणमयी की पेपर युनिट देश में अपनी तरह का अनूठा प्रयोग बन गया है। यह सफलता कितना सुकून देती है?
इस प्रोजेक्ट को कल्याणमयी की टीम ने अपनी मेहनत से सींचा है। हमारे यहां एटीसी में बहुत सा कागज उपयोग के बाद दुबारा काम में नहीं आता था। साथ ही हमने उस कागज को बचाना शुरू किया जो बाहर बेचा जाता था। जब कागज इकट्ठा होने लगा तो शुरुआती दौर में हमने इसे तिहाड़ जेल भेजना शुरू किया। वहां से हमें बाटर सिस्टम के तहत हैंडमेड पेपर मिलने लगे। इस प्रोजेक्ट की बेहतर प्लानिंग के लिए हमने पूरा मार्केट सर्वे किया। इसके लिए टीम ने जयपुर के कागज उद्योग का भी फैक्ट्रियों में जाकर अध्ययन किया। आज आलम यह है कि पूरे देश में प्राधिकरण के रोजमर्रा उपयोग में आने वाली फाइलें, स्टेशनरी सब हमारे प्लांट से तैयार होकर पहुंच रही हैं।
इस प्रोजेक्ट में कई संस्थाएं दिलचस्पी ले रही हैं?
सीबीआई की पुरानी फाइलें गलाकर नया कागज बनाए जाने को लेकर काम जारी है। इरकॉन के लिए हम ग्रीटिंग बना रहे हैं। जेट एयरवेज, श्रीराम स्कूल, श्रेयरवुड कॉनवेंट स्कूल इत्यादि के साथ भी गठजोड़ करके कागज बनाने और ग्रिटिंग्स को लेकर काम किया जा रहा है।
इस सफलता का आधार कहां से बनता है?
5 क्रेजी वुमन इसका आधार हैं। कहते हैं न क्रांति के लिए भीड़ की नहीं, नेतृत्व की जरूरत होती है। कल्याणमयी की पांचो क्रेजी वुमन्स ने मजबूत नेतृत्व और योजनाबद्ध तरीके से काम किया है। पूरे देश में जहां-जहां प्राधिकरण का विस्तार है, हमने कल्याणमयी के लिए मिशन बनाकर काम किया।
योजनाओं के विस्तार के लिए क्या कर रहे हैं?
अपनी पेपर युनिट के लिए हम स्कूलों के साथ मिलकर समर वर्कशाप भी कर रहे हैं। मुंबई हवाईअड्डे के पास एनआईआईटी के सहयोग से कम्प्यूटर सेंटर स्थापित किया गया है। साथ ही दिल्ली को हरा-भरा बनाने के लिए भी हमने एक प्रोजेक्ट भी हाथ में लिया है। 
कम बजट में आप इतना सब कैसे कर पा रहे हैं?
केन्द्र सरकार के अनुसार प्राधिकरण के कुल लाभ का 2 फीसदी सीएसआर के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। प्राधिकरण के लिए यह 16-17 करोड़ के आसपास बैठता है। लेकिन हम जुटे हुए हैं। ओएनजीसी के साथ भी बात चल रही है। उनका सीएसआर बजट करीब 400 करोड़ है। हमारे पास देशभर में मजबूत नेटवर्क है, प्लानिंग है और उनके पास बजट। इसीलिए हम भविष्य में बड़ी योजनाओं को लेकर सफल साबित होंगे।
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